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जीपीएम में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: तय समय पर नहीं जारी हो सका 5वीं-8वीं का रिजल्ट, आखिर जिम्मेदार कौन?

जीपीएम में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: तय समय पर नहीं जारी हो सका 5वीं-8वीं का रिजल्ट, आखिर जिम्मेदार कौन?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ शासन और स्कूल शिक्षा विभाग भले ही शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बताने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की स्थिति इन दावों की सच्चाई सामने ला रही है। शासन द्वारा 30 अप्रैल को कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा का परिणाम जारी करने की तिथि तय की गई थी, लेकिन जीपीएम जिले में तय समय बीत जाने के बाद भी परिणाम जारी नहीं हो सका।

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जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ….!

सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश के कई जिलों में परिणाम समय पर घोषित कर दिए गए, लेकिन जीपीएम जिले में शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थी और पालक पूरे दिन इंतजार करते रहे। परिणाम जारी नहीं होने से विद्यार्थियों में असमंजस और पालकों में नाराजगी का माहौल देखा गया।

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अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? जब शासन द्वारा पहले से स्पष्ट निर्देश और समयसीमा तय कर दी गई थी, तो फिर संबंधित अधिकारियों ने समय पर तैयारी क्यों नहीं की? क्या जिले में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है या फिर जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त हैं?

सूत्रों की मानें तो कई विकासखंडों से समय पर डाटा अपडेट नहीं किया गया, वहीं समन्वय की भारी कमी भी सामने आई है। यदि यह सही है तो सीधे तौर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में इस तरह की लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही रजनीश तिवारी ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि इस प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया जाएगा। डीईओ के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई वास्तव में होती है या फिर मामला केवल चेतावनी और औपचारिक बयान तक सीमित रह जाएगा।

शिक्षा विभाग में बार-बार सामने आ रही अव्यवस्थाएं अब यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर जिम्मेदारी तय कब होगी? क्योंकि हर बार विद्यार्थी और पालक ही परेशान होते हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच निकलते हैं।

अब जिले के विद्यार्थियों और पालकों की निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में वास्तव में जवाबदेही तय होगी, या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

वहीं दूसरी ओर जिला सक्ती ने बेहतर प्रशासनिक समन्वय, समयबद्ध कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दोपहर 12 बजे ही परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। सक्ती जिले में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. कुमुदिनी वाघ द्विवेदी ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। बताया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने में विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिलीप पटेल की भूमिका काफी सराहनीय रही।

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